अपनी जमीन से पानी की पाइपलाइन ले जाने का विरोध कर रहे किसानों पर पुलिस द्वारा चलाई गई गोली से मंगलवार को पुणे में चार किसानों की मौत हो गई। मृतकों में एक महिला भी शामिल है। पुणे के मावल तालुका के किसानों ने पाइपलाइन के लिए भूमि अधिग्रहण के विरोध में मंगलवार सुबह 10 बजे से मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे और पुराना हाइवे जाम कर दिया था। किसान निकट के पावना बांध से पिंपरी-चिंचवड़ औद्योगिक क्षेत्र को ले जाई जा रही पानी की पाइपलाइन का विरोध कर रहे थे। किसानों का कहना था कि इस पाइपलाइन के लिए उन्हें अपनी जमीन गंवानी पड़ रही है। साथ ही बांध का पानी औद्योगिक क्षेत्र को देने से आसपास के गांवों में पीने के पानी की किल्लत भी हो सकती है। विरोध प्रदर्शन के लिए जुटे करीब चार सौ किसानों ने स्थानीय बसों पर पथराव किया और मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे का आवागमन भी ठप कर दिया। पुणे के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) संदीप कर्णिक के अनुसार विरोध कर रहे किसानों को एक्सप्रेस वे से हटाने का प्रयास कर रहे पुलिसकर्मियों पर जब किसानों ने पथराव शुरू किया तो पुलिस को लाठी और आंसूगैस का सहारा लेना पड़ा। इसके बावजूद भीड़ के काबू में न आने पर पुलिस को गोलियां चलानी पड़ीं। जिसके कारण एक व्यक्ति के पुलिस की गोली से मारे जाने और अन्य तीन के भगदड़ में गिरकर मरने की खबर है। पुलिस अधीक्षक के अनुसार किसानों द्वारा किए गए पथराव में करीब दो दर्जन पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। घायलों में एक पुलिस उपनिरीक्षक की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के विरोध में मंगलवार को महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्षी दलों ने भी हंगामा किया।
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Wednesday, August 10, 2011
Saturday, July 30, 2011
कानून बना पर नहीं लिया गया राष्ट्रपति का अनुमोदन: टाटा
सिंगुर मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायाधीश इंद्र प्रसन्न मुखर्जी द्वारा सिंगुर विकास व पुनर्वास अधिनियम 2011 की वैधता पर पूछे गए सवाल के जवाब में टाटा के अधिवक्ता समरादित्य पाल ने शुक्रवार को अपनी दलील रखी। श्री पाल ने न्यायाधीश को जमीन अधिग्रहण व वापसी से संबंधित मामलों में सुप्रीम कोर्ट और अन्य हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फैसलों की नजीर पेश की। साथ ही कहा कि संविधान में संयुक्त रूप से जमीन अधिग्रहण कानून सूचीबद्ध है ऐसे में कोई भी राज्य सरकार राष्ट्रपति के अनुमोदन के बिना नया कानून नहीं बना सकता। सिंगुर अधिनियम इसलिए असंवैधानिक और अवैध हैं क्योंकि विधानसभा में राज्य सरकार बिल पास करा कर सिर्फ राज्यपाल का अनुमोदन लिया है। नई पीठ में मामले की दूसरे दिन हुई सुनवाई में टाटा के अधिवक्ता ने मुख्य रूप से सुप्रीम कोर्ट और अन्य उच्च अदालतों द्वारा दिए गए फैसले के कानूनी पहलुओं को रखा। न्यायाधीश इंद्र प्रसन्न मुखर्जी से श्री पाल ने कहा कि जमीन अधिग्रहण को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा विभिन्न समय पर दिए गए फैसले से प्रमाणित होता है कि बंगाल सरकार ने जो कानून बनाया है वह असंवैधानिक है। कोई भी राज्य सरकार जमीन अधिग्रहण के मामले में एकेला ही बिल लाकर नया कानून नहीं तैयार कर सकता। सिर्फ विधानसभा में बिल पास करा कर राज्यपाल से सहमति लेने से कानून नहीं बनाया जा सकता। राष्ट्रपति का अनुमोदन आवश्यक है। वहीं किसी भी जमीन को अधिग्रहण से पहले सरकार को जिसके पास मालिकाना है उसे सूचित करना पड़ता है। कानून बनने के पास जिस तरह से चुपके से नोटिस लगाया गया और पुलिस फोर्स का इस्तेमाल जमीन पर कब्जा किया गया वह असंवैधानिक व अनैतिक है। टाटा ने जमीन जबर्दस्ती नहीं ली थी उसे राज्य सरकार से लीज पर लिया था। मामल पर अगली सुनवाई सोमवार को होगी।
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