ठ्ठ जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली केंद्र सरकार किसानों को 11 हजार करोड़ रुपये का तोहफा देने जा रही है। उन्हें सस्ती दरों पर कर्ज देने की स्कीम को चालू वित्त वर्ष के दौरान भी जारी रखने के लिए सरकार 10,901 करोड़ रुपये की सब्सिडी देगी। यह सब्सिडी उन वाणिज्यिक, सहकारी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को दी जाएगी जो किसानों को तीन फीसद सब्सिडी पर कर्ज देंगे। इस बारे में गुरुवार को कैबिनेट की बैठक में फैसला होने की उम्मीद है। इस स्कीम में समय पर कर्ज की अदायगी करने वाले किसानों को महज चार फीसद ब्याज देना होता। इसके तहत किसान तीन लाख रुपये तक की राशि कर्ज ले सकते हैं। वैसे कर्ज की परिपक्वता अवधि काफी कम होती है, लेकिन ब्याज दर कम होने की वजह से किसान बड़ी संख्या में इसका फायदा उठाते हैं। बैंक जितनी सब्सिडी देते हैं, उसकी भरपाई केंद्र के खजाने से की जाती है। कैबिनेट इस राशि को ही स्वीकृति देगी। तीन फीसद ब्याज सब्सिडी देने की स्कीम को जारी रखने का एलान पूर्व वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने वर्ष 2012-13 का बजट पेश करते हुए किया था। वित्त मंत्रालय की तरफ से तैयार रिपोर्ट के मुताबिक सरकार कुल 10,901 करोड़ रुपये बतौर कर्ज सब्सिडी उपलब्ध कराएगी। इसमें से 3267 करोड़ रुपये सहकारी बैंकों व क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को दिए जाएंगे। शेष 7634 करोड़ रुपये की राशि सरकारी बैंकों को दी जाएगी। लोन की यह सुविधा किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) रखने वाले छोटे व सीमांत किसानों को भी मिलेगी। केसीसी धारक किसानों को फसल बाद कर्ज पर यह सुविधा मिलेगी। उनके लिए कर्ज की अवधि सिर्फ छह महीने होगी। इसके लिए 442 करोड़ रुपये अलग से जारी किए जा रहे हैं। बताते चलें कि इस स्कीम को केंद्र सरकार ने वर्ष 2009-10 में लागू किया था। पहले सिर्फ एक फीसद की ब्याज सब्सिडी देने की बात थी जिसे बाद में बढ़ा कर दो और अब तीन फीसद कर दिया गया है। किसान क्रेडिट कार्ड धारक किसानों के लिए यह स्कीम पिछले वित्त वर्ष से ही लागू किया गया है। चालू वित्त वर्ष के दौरान सरकार ने 5.75 लाख करोड़ रुपये के कृषि कर्ज देने का लक्ष्य रखा है।
Friday, September 7, 2012
सस्ते फसली ऋण के लिए बैंकों को मिलेंगे 10901 करोड़
नई दिल्ली (एसएनबी)। सरकार ने किसानों को सस्ता फसली ऋण देने के लिए बैंकों को चालू वित्त वर्ष के दौरान 10,901 करोड़ रुपए की ब्याज सहायता राशि जारी करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय किया गया। इसमें कहा गया ‘सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, सहकारी बैंकों और नाबार्ड को ब्याज में होने वाले नुकसान की भरपाई जारी रखी जाएगी। सरकार से मिलने वाली ब्याज सहायता से बैंक किसानों को तीन लाख रुपए तक का अल्पावधि फसली कर्ज सात प्रतिशत की सस्ती ब्याज दर पर उपलब्ध कराते हैं।’ मंत्रिमंडल ने ऐसे कर्ज पर बैंकों को दी जाने वाली ब्याज सहायता के 10,901 करोड़ रुपए जारी करने की अनुमति देने के साथ ही नाबार्ड को भी 3,267 करोड़ रुपए सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को पुनर्वित के लिए ब्याज सहायता देने का फैसला (शेष पेज 2)
किसानों को मिलता रहेगा सस्ता कर्ज
ठ्ठ जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली केंद्र सरकार चालू वित्त वर्ष में भी किसानों के लिए सस्ते कर्ज की स्कीम जारी रखने पर सहमत हो गई है। करीब 11 हजार करोड़ रुपये के इस तोहफे पर गुरुवार को कैबिनेट ने मुहर लगा दी। किसानों को सात प्रतिशत ब्याज पर तीन लाख रुपये तक का कर्ज मिलेगा। जो किसान समय पर भुगतान करेंगे उन्हें ब्याज पर तीन प्रतिशत की और छूट मिलेगी। वित्त वर्ष 2012-13 के दौरान सरकार इस मद पर 10,901 करोड़ रुपये की सब्सिडी देगी। यह सब्सिडी उन बैंकों, सहकारी बैंकों व क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को दी जाएगी जो किसानों को सात प्रतिशत की दर पर पर कर्ज देंगे। केंद्रीय मंत्रिमंडल में पारित प्रस्ताव के मुताबिक समय पर पुराने कर्ज की अदायगी करने वाले किसान अब महज चार प्रतिशत ब्याज पर कर्ज ले सकेंगे। वैसे कर्ज की परिपक्वता अवधि काफी कम होती है लेकिन ब्याज दर कम होने की वजह से किसान बड़ी संख्या में इसका फायदा उठाते हैं। समय पर लोन चुकाने वाले किसानों के लिए तीन प्रतिशत ब्याज सब्सिडी देने की स्कीम को आगे जारी रखने का एलान पूर्व वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने वर्ष 2012-13 का बजट पेश करते हुए ही कर दिया था। लोन की यह सुविधा किसान क्रेडिट कार्ड रखने वाले छोटे व सीमांत किसानों को भी मिलेगी। इसके लिए 442 करोड़ रुपये की राशि अलग से जारी की जाएगी। नेपा का होगा पुनरुद्धार एक अन्य फैसले में कैबिनेट ने सार्वजनिक क्षेत्र की नेपा लिमिटेड के पुनरुद्धार पैकेज को भी स्वीकृति दे दी है। इसके तहत 234.18 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इसके अलावा 599.59 करोड़ रुपये के कर्ज को माफ करने का भी प्रस्ताव है। कंपनी की इक्विटी शेयर पूंजी को भी घटाकर 266.36 करोड़ रुपये तक लाने का प्रस्ताव है। एसटी छात्रों को स्कॉलरशिप कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने कक्षा नौ व दस के अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए स्कॉलरशिप योजना को भी मंजूरी दे दी है। हर साल करीब 22 लाख विद्यार्थी इस छात्रवृत्ति का लाभ ले सकेंगे। इसके तहत छात्रावास में रहने वाले छात्रों को 350 रुपये प्रति माह और अन्य छात्रों को 150 रुपये प्रति माह छात्रवृत्ति मिलेगी। छात्रावास वाले छात्रों को पुस्तक अनुदान के रूप में सालाना 1000 रुपये और अन्य छात्रों को 750 रुपये मिलेगा। एक अन्य फैसले में सीसीईए ने खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के बुनियादी ढांचे के विकास की एक योजना को भी मंजूरी दे दी है। सरकार दस परियोजनाओं के लिए ऐसी ही एक स्कीम को साल 2009 में भी पारित कर चुकी है। इनमें से दो परियोजनाओं का काम पूरा हो चुका है।
Saturday, August 4, 2012
सावन में भी तरसे यूपी के किसान
सावन में भी यूपी के किसान बारिश को तरसते रहे। सूबे के छह जिलों के अलावा बाकी सभी जिलों में मानसून की नाराजगी बनी रही। इनमें सामान्य से कम बारिश रिकार्ड की गई। इससे सीधा नुकसान खरीफ की बुआई पर पड़ा है। मौसम विभाग के आंकड़े के अनुसार सूबे के उन 26 जिलों में सामान्य से आधी बारिश हुई जिनको धान की बेहतर उपज देने वाला जिला माना जाता है। मेरठ, बागपत, महाराजगंज, कुशीनगर, गौतमबुद्धनगर, रामपुर, गाजियाबाद, हाथरस व हापुड़ में सबसे कम बारिश हुई। केवल छह जिलों ललितपुर, कांशीराम नगर, चित्रकूट, बलरामपुर, अंबेडकर नगर व कानपुर देहात पर ही इंद्रदेव मेहरबान रहे। इन जिलों में सामान्य से थोड़ा अधिक पानी बरसा। सावन के बादलों की रुसवाई ने धान उत्पादक किसानों की हिम्मत तोड़ दी है। जिसके चलते धान की रोपाई लक्ष्य से करीब 25 फीसद कम रही। दलहनी फसलों, मक्का, ज्वार व बाजरा की बुआई की स्थिति भी कमोबेश ऐसी ही है। बुंदेलखंड और पश्चिमी यूपी के जिलों में हालात अधिक नाजुक है। पश्चिमी जिलों में खरीफ फसलों के आच्छादन क्षेत्र में तीस प्रतिशत से अधिक कमी आई है। बुंदेलखंड में 55,840 हेक्टयर धान रोपाई के विपरीत साढ़े 12 हजार हेक्टेयर में आच्छादन हो सका है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसके सिंह का कहना कि खरीफ फसलों की बुआई का आदर्श समय 15 जुलाई तक माना जाता है। इसके बाद बुआई में देरी से प्रति सप्ताह उत्पादन दस से 15 फीसद घटता है। जुलाई में अपेक्षित वर्षा न होने से उत्पादन का लक्ष्य पूरा करना मुश्किल हो गया है। इस बार प्रदेश में अब तक सामान्य से 23 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। यदि अगस्त में भी इंद्रदेव की विशेष कृपा नहीं होती है तो वर्ष 2007 व 2002 के सूखे जैसी परिस्थितियां पैदा हो सकती है। सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट फार ड्राईलैंड एग्रीकल्चर (सीआरआइडीए) के आंकड़ों के मुताबिक 2002 में 19 प्रतिशत वर्षा सामान्य से कम होने पर देश का खाद्यान्न उत्पादन 2.40 लाख टन गिरा था। 2007 में वर्षा 23 प्रतिशत कम हुई परंतु खरीफ की फसलों का उत्पादन वर्ष 2002 के सापेक्ष कम ही गिरा था। मानसून का आधे से अधिक समय बीतने और वर्षा सामान्य से कम होने से कृषि विभाग डैमेज कंट्रोल की कोशिशों में लगा जरूर है परंतु ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली संकट एवं नहरों में पानी न पहुंचना किसानों की मुसीबतें बढ़ा रही है। हालात में सुधार बादलों की मेहरबानी पर ही निर्भर है। हालात बेकाबू नहीं : डीएम सिंह नवनियुक्त कृषि निदेशक डीएम सिंह का कहना है कि प्रदेश में औसत से कम वर्षा भले ही हो परंतु पिछले तीन चार दिनों में पश्चिमी यूपी में वर्षा होने से राहत मिली है। वर्षा की स्थिति और किसानों की जरूरतों को पूरा करने पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। निदेशालय में कंट्रोल रूम की स्थापना कर दी है। किसान अपनी समस्या 0522-2206925 फोन नंबर पर दर्ज करा सकते हैं। कंट्रोल रूम में प्रात: दस से शाम पांच बजे तक सक्षम अधिकारी मौजूद रहेंगे।
पंजाब ने केंद्र से मांगे 2380 करोड़
कमजोर मानसून के कारण धान की फसल पर पड़ रहे नकारात्मक असर और किसानों की बदहाली को ध्यान में रखते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने केंद्र से 2380 करोड़ का पैकेज मांगा है। इस संबंध में प्रधानमंत्री को भेजे एक मांग पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा है कि अब तक के सबसे बुरे मानसून से बुरी तरह प्रभावित हुए पंजाब के किसानों को तुरंत इस पैकेज की दरकार है। पंजाब में 27.80 लाख हेक्टेयर में धान और खरीफ की अन्य फसलों जैसे कि नरमा और मक्की आदि की बिजाई की गई है। मानसून में 65 फीसदी कम बारिश होने के कारण किसानों को सिंचाई के लिए डीजल से चलने वाले पंप सेटों का प्रयोग करना पड़ रहा है। जिसकी वजह से किसानों की आर्थिक स्थिति बदहाल होती जा रही है। बादल ने कहा कि 1960 के बाद एक बार फिर भारत विशेषकर पंजाब और उत्तरी पश्चिमी राज्यों में पुन: गंभीर सूखे वाली स्थिति पैदा हो गई है। मानसून के शेष रहते समय के दौरान भी बारिश होने के आसार नहीं दिख रहे। उन्होंने कहा कि पंप सेटों से सिंचाई के लिए 550 करोड़ रुपये का अधिक खर्चा करना पड़ेगा। इस तरह मोनो ब्लॉक पंपों को सबमर्सिबल ट्यूबवेलों में बदलने के लिए किसानों को 300 करोड़ रुपये का अधिक खर्च करने होंगे। इसके अतिरिक्त पंजाब राज बिजली निगम लिमिटेड को भी 1530 करोड़ रुपये का अधिक बोझ बर्दाश्त करना पड़ेगा।
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