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Monday, April 4, 2011
Tuesday, March 22, 2011
Sunday, February 20, 2011
गेहूं की फसल में कल्ले निकलने व गांठे बनते समय सिंचाई करें
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को गेहूं की फसल में कल्ले निकलते समय दूसरी सिंचाई एवं गांठे बनते समय तीसरी सिंचाई करने की सलाह दी है। वैज्ञानिकों के अनुसार दोमट मिट्टी में विलम्ब से बुआई वाले क्षेत्नों में नत्नजन की एक चौथाई मात्रा सिंचाई के बाद ओट आने पर दें, हल्की बलुई दोमट मिट्टी में नत्नजन की शेष मात्ना का आधा भाग सिंचाई के बाद ओट आने पर दिया जाए।
फसल सतर्कता समूह के कृषि वौानिकों की सलाह के अनुसार गेहूं की फसल में यदि खपतवार निकाई, गुडाई से नियंत्नित न हो तो चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों जैसे बथुआ, सत्यानाशी, हिरनखुरी, कृष्णनील, गजरी, प्याजी तथा संकरी पत्ती जैसे गेहुआ व जंगली जई के नियंत्नण के लिए सल्फो सल्फ्यूरान 75 प्रतिशत, 32 मिली प्रति हेक्टेयर मेटा सल्फ्यूरान मिथाइल पांच प्रतिशत डब्लू, जी की 40 ग्राम प्रति हेक्टेयर 800 से 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से चपटे नाजिल वाले स्पेयर से बुआई के 30-35 दिन बाद छिड़काव करें। गेहूं में पूर्ण झुलसा का प्रकोप होने पर मैंकोजेब दो किग्रा प्रति हेक्टेयर या जिनेब 75 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण 2.5 किग्रा प्रति हेक्टेयर याथीरम 50 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण 20 किग्रा. के साथ 20 किग्रा. यूरिया को प्रति हेक्टेयर मिलाकर छिड़काव करना चाहिए.
फसल सतर्कता समूह के कृषि वौानिकों की सलाह के अनुसार गेहूं की फसल में यदि खपतवार निकाई, गुडाई से नियंत्नित न हो तो चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों जैसे बथुआ, सत्यानाशी, हिरनखुरी, कृष्णनील, गजरी, प्याजी तथा संकरी पत्ती जैसे गेहुआ व जंगली जई के नियंत्नण के लिए सल्फो सल्फ्यूरान 75 प्रतिशत, 32 मिली प्रति हेक्टेयर मेटा सल्फ्यूरान मिथाइल पांच प्रतिशत डब्लू, जी की 40 ग्राम प्रति हेक्टेयर 800 से 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से चपटे नाजिल वाले स्पेयर से बुआई के 30-35 दिन बाद छिड़काव करें। गेहूं में पूर्ण झुलसा का प्रकोप होने पर मैंकोजेब दो किग्रा प्रति हेक्टेयर या जिनेब 75 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण 2.5 किग्रा प्रति हेक्टेयर याथीरम 50 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण 20 किग्रा. के साथ 20 किग्रा. यूरिया को प्रति हेक्टेयर मिलाकर छिड़काव करना चाहिए.
Friday, February 18, 2011
Sunday, December 26, 2010
तेजी के बावजूद प्याज उत्पादक मायूस
प्याज की कीमत में आई तेजी के बावजूद किसानों के चेहरे पर खुशी नहीं देखी जा रही है क्योंकि सारा मुनाफा बिचौलिये कमा रहे हैं। आजादपुर मंडी पहुंचे किसानों का कहना है कि कीमत में आई तेजी का लाभ उन्हें नहीं मिल रहा है। किसानों को मंडी में प्याज 15 से 20 रुपये प्रति किलो के भाव से बेचनी पड़ रही है। कारोबारी थोक भाव में प्याज अधिकतम 35 रुपये किलो तक बेच कर 55 फीसदी तक मुनाफा कमा रहे हैं। ऐसे में प्याज की खेती में जो लागत आई है, वह भी निकल जाए तो उनके लिए काफी होगा। शनिवार को प्याज लेकर मंडी पहुंचे अलवर, राजस्थान के माचा गांव के किसान अख्तर इमाम ने बताया कि वह लगभग 1020 किलो प्याज लेकर आए हैं। इसे उन्होंने प्रति चालीस किलो 575 रुपये से 600 रुपये तक में बेचा। प्याज की एक बीघे की खेती में खाद, बीज, सिंचाई की लागत करीब तीस हजार रुपये तक लग रही है। फसलों में कीट लग जाने के कारण प्याज का आकार में वृद्धि नहीं होने से प्रति बीघा उत्पादन में तीस से चालीस फीसदी तक की कमी आई है। इससे नुकसान उठाना पड़ रहा है। मंडी में करीब 3600 किलो प्याज लेकर आए अलवर के किसान नसीरुद्दीन कहते हैं कि प्याज की कीमत में भले ही तेजी आई है, लेकिन इस साल प्याज की खेती उनके लिए घाटे का सौदा साबित हुआ। वह कहते हैं कि इस तेजी में भी उन्हें प्याज 20 रुपये प्रति किलो तक बेचनी पड़ रही है। सारा मुनाफा बिचौलिया खा रहे हैं। किसानों को इस तेजी का कोई लाभ नहीं मिल रहा है। राजस्थान के किसान सिरूद्दीन व सादाल की भी यही पीड़ा है। वे कहते हैं कि किसानों को प्याज जब तीन से चार रूपये प्रति किलो के दर से बेचना पड़ रहा था, तब किसी ने भी हाय तौबा नहीं मचाई। अब तक न तो सरकार को ही किसानों का ध्यान आया और न ही मीडिया ने ही इस ओर ध्यान दिया। किसान कर्ज में डूबे हैं।
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