Showing posts with label २१ दिसम्बर २०१०. Show all posts
Showing posts with label २१ दिसम्बर २०१०. Show all posts

Monday, January 3, 2011

भारत में हर वर्ष ५.९ करोड़ टन फलों और सब्जियों की बर्बादी

खाद्य एवं कृषि राज्यमंत्री प्रो. के. वी. थामस ने आज कहा की देश में उपयुक्त शीतभण्डारगृह आधारभूत ढाँचे की कमी के कारण करीब ५.९ करोड़ टन के फल एवं सब्जियां प्रतिवर्ष बर्बाद होती है. भारतीय उद्योग परिसंघ (सी.आई.आई.) द्वारा शीतभण्डार श्रृंखला पर यहाँ आयोजित एक सम्मलेन में थामस ने कहा कि भारत वर्ष भर में ६.८ करोड़ टन फल एवं १२.९ करोड़ टन सब्जियों को पैदा करता है जो दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है. मंत्री ने कहा कि भारत में पैदा होने वाली करीब ३० प्रतिशत फल और सब्जियां पर्याप्त आधारभूत ढांचे के अभाव में बर्बाद हो जाती हैं जो चिंता का विषय है.

थामस ने कहा कि देश में अभी केवल २ प्रतिशत बागवानी उत्पादों का प्रसंस्करण किया जाता है जो चीन में होने वाले औसतन १५ प्रतिशत के प्रसंस्करण और एशिया प्रशांत क्षेत्र के ८ प्रतिशत के औसत प्रसंस्करण से काफी कम है. भारत में कुल ५,४०० शीत भण्डारगृह है जिसमें से ४,८७५ निजी क्षेत्र के हैं, ४०० सहकारिता संस्थाओं के पास हैं और शेष १२५ सार्वजनिक उपक्रम इकाइयों के हैं. शीत भण्डारगृहों कि कुल संख्या में से करीब ५० फीसदी उत्तर प्रदेश, पंजाब और पश्चिम बंगाल में स्थित हैं.

Tuesday, December 21, 2010

यूपी में फेल खाद्य नमूने केंद्र की लैब में पास

 खाद्य पदार्थ में मिलावट की परतें उधेड़ने वाली परीक्षण रिपोर्ट में भी मिलावट होने लगी है। लखनऊ की फूड लेबोरेट्री ने जिन नमूनों को फेल साबित किया, उनमें 11 को मैसूर की सेंट्रल फूड लेबोरेट्री ने पास कर दिया। हाल में आई तीन रिपोर्टो में तो जहरीले खाद्य पदार्थो को भी खाने योग्य ठहरा कर आरोपियों को बरी होने का हथियार दे दिया। खाद्य एवं औषधि विभाग (एफडीए) द्वारा आगरा मंडल में मिलावट के संदेह पर भरे जाने वाले खाद्य पदार्थो के नमूनों को जांच के लिए लखनऊ की राजकीय जन विश्लेषक लैब और मेरठ की संभागीय जन विश्लेषक लैब में भेजा जाता है। खाद्य अपमिश्रण अधिनियम में बदलाव के तहत खाद्य पदार्थ बेचने वाला अगर स्टेट लेबोरेट्री की जांच से संतुष्ट नहीं है, तो कोर्ट की अनुमति पर उन नमूनों की पुन: जांच मैसूर की सेंट्रल फूड लेबोरेट्री से कराए जाने का प्रावधान है। विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक, 2007 से लेकर अब तक जिले में भरे जाने वाले नमूनों में से 600 से अधिक फेल पाए गए। इनमें से 88 नमूनों को कोर्ट के आदेश पर पुन: जांच के लिए मैसूर की सेंट्रल लैब भेजा गया। इनमे से 11 नमूनों को उसने पास कर दिया है। हाल में भी ऐसी तीन रिपोर्टे आई हैं। इनके सहारे आरोपी कोर्ट से बरी भी हो चुके हैं। फार्म-6 से शुरू होता है खेल : मिलावटखोरों को संरक्षण देने का खेल फार्म-6 की कार्रवाई से ही शुरू हो जाता है। नियमानुसार हर नमूना भरने की कार्रवाई में इंस्पेक्टर द्वारा खाद्य पदार्थ विक्रेता को फार्म-6 की एक प्रति भरकर देनी होती है, मगर आधे से अधिक नमूनों की कार्रवाई में फार्म-6 पार्टी को नहीं दिया जाता। इसके बाद अगर नमूना फेल आता है तो धन उगाही के सहारे फार्म-6 पर अन्य किसी का नाम दर्ज कर केस फाइल करा दिया जाता है और बाद में उसे खत्म भी करा दिया जाता है।