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Sunday, January 30, 2011

अफ्रीकी देश हरियाणा से सीखेंगे खेती-किसानी


कृषि क्षेत्र में हरियाणा की प्रगति गाथा सुनकर अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधि अभिभूत हैं। कृषि, बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि शिक्षा और औद्योगिक तकनीक के क्षेत्र में हरियाणा के सहयोग का भरोसा दिलाने पर वहां के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को अपने देश आने का न्योता दिया। हुड्डा शुक्रवार को यहां अफ्रीकी देशों के दूतावासों के साथ संयुक्त कृषि व्यापार संबंधों पर आयोजित संगोष्ठी में बोल रहे थे। द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने पर जोर देते हुए हुड्डा ने कहा कि इसमें काफी संभावनाएं हैं। हरियाणा के साथ अफ्रीकी देशों की भागीदारी से नए आर्थिक परिदृश्य का उदय होगा। भारत का अफ्रीकी देशों से तालमेल का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले पांच सालों में द्विपक्षीय व्यापार में चार गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। हरियाणा के विकास का ब्योरा देते हुए हुड्डा ने कहा कि राज्य के पास देश की कुल भूमि का केवल 1.34 फीसदी है। इसी के बल पर राज्य ने प्रगति कर देश में अपना स्थान बनाया है। राज्य में नई औद्योगिक नीति के तहत हरियाणा सरकार द्वारा कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को प्रोत्साहनों के साथ विशेष ध्यान दिया गया है। मुख्यमंत्री ने नाइजीरिया के किसानों के प्रतिनिधिमंडल को हरियाणा आने का निमंत्रण दिया ताकि उन्हें वहां की प्रगति की जानकारी मिल सके। जबकि युगांडा की उच्चायुक्त मिनिषा जयंत माधवानी ने मुख्यमंत्री हुड्डा को अपने यहां 11 अक्टूबर से आयोजित व्यापार मेले में आने का न्योता भी दिया। उन्होंने अपने साथ विकास के प्रतीक किसानों को भी लाने की अपील की। हुड्डा ने बासमती चावल और मुर्रा भैंसों का भी जिक्र किया, जिनके माध्यम से श्वेत क्रांति सफल हो पाई है। उन्होंने इथोपिया में कृषि, सिंचाई और पशुधन के आदान-प्रदान कार्यक्रमों में सहयोग की पेशकश की। इसमें राज्य के हिसार स्थित लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा अध्ययन विश्वविद्यालय पूरी मदद करेगा। बुर्किना फासो दूतावास के आर्थिक सलाहकार इदरीस राउवा ने टमाटर प्रसंस्करण के क्षेत्र में परस्पर सहयोग की बात कही। पानीपत के अचार उद्योग का जिक्र करते हुए हुड्डा ने कहा कि इससे बुर्किना फासो को काफी लाभ मिल सकता है।

उर्वरता बचाने को हरियाणा ने मांगा विशेष पैकेज


घट रही खेती योग्य भूमि की उर्वरता और नीचे खिसकता जल स्तर हरियाणा की मुश्किलों का सबब बन गया है। फसलों की उत्पादकता घटने को लेकर हरियाणा के माथे पर बल पड़ने लगा है। हरियाणा ने केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से आगामी बजट में राज्य के कृषि क्षेत्र की इन चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए विशेष पैकेज के प्रावधान की मांग की है। अगले वित्त वर्ष के आम बजट से कृषि क्षेत्र में सुधार को लेकर हरियाणा ने कई उम्मीदें लगा रखी हैं। इनमें भूमि संरक्षण और सिंचाई प्रमुख मुद्दे हैं, जिन्हें लेकर राज्य की चिंताएं बढ़ गई हैं। उत्पादकता बढ़ाने के चक्कर में रासायनिक खादों का प्रयोग और सिंचाई के लिए भूजल का अंधाधुंध दोहन अब खतरनाक हद तक पहुंच गया है। वैज्ञानिकों ने जल संकट के लिए राज्य को पहले ही सतर्क कर दिया है। आने वाले सालों में फसलों की सिंचाई के लिए भारी संकट पैदा होने वाला है। इसी तरह जल और हवाओं से भूमि का क्षरण भी तेज गति से हो रहा है। हरियाणा ने प्रणब मुखर्जी को सौंपे ज्ञापन में राज्य के लिए खास पैकेज घोषित करने का अनुरोध किया है। हरियाणा को आशंका है कि इसके लिए खास प्रबंध करने में देरी खाद्यान्न की पैदावार के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। यह देश की खाद्यान्न सुरक्षा के लिए भी खतरा साबित होगी। राज्य में अब गेहूं व चावल के साथ मक्का और मोटे अनाज को भी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन में शामिल किए जाने की जरूरत है। कृषि उत्पादकता की थम रही रफ्तार को गति प्रदान करने के लिए हरियाणा ने पशुधन विकास व दुग्ध उत्पादन बढ़ाने का सुझाव दिया है। हालांकि इसकी राह में पशुचारे की किल्लत बड़ी मुश्किल है। हरियाणा की ओर से इसके लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही गई है।