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Tuesday, February 22, 2011
मौत के खेल में किसानों का इस्तेमाल
यूपी में मिलावटखोरों का धंधा तो फल फूल रहा ही है, कच्ची सब्जियों को कृत्रिम रंग से रंग कर खुलेआम हर बाजारों में बेंचा जा रहा है। यही नहीं गहरी नींद में सो रही सरकार की लाचारी का फायदा उठाते हुए बड़े सौदागर सब्जियों में हार्मोन्स की सूई लगाकर पैदावार बढ़ाने में किसानों का इस्तेमाल कर रहे हैं। कृषि और हार्टीकल्चर विभाग की उदासीनता से जहर के सौदागरों का हौंसला बुलंद है तो खा एवं औषधि प्रशासन विभाग सब्जियों में ऑक्सीटोसिन के इस्तेमाल से पल्ला झाड़ लिया है। वह कह रहा है कि सब्जियों में हार्मोन्स की सूई लगाने को रोकने की जिम्मेदारी हार्टीकल्चर विभाग की है।
हरी सब्जियां ग्रीन प्वाइजन बन चुकी हैं। सरकार इससे बेतकल्लुफ है। जहर के सौदागरों ने लौकी, गाजर, खीरा, करैला, शलजम, टमाटर से लेकर यहां तक कि पपीते में ऑक्सीटोसिन का इंजेक्शन लगाकर पैदावार बढ़ाने और उसके प्राकृतिक आकार में बदलाव पैदा कर दिया है। जहर का यह कारोबार खुलेआम हो रहा है। इसके अलावा सब्जियों को कृत्रिम रंग से रंगने का काम भी बड़ी-बड़ी मंडियों में चल रहा है। आरटीआई ऐक्टिविस्ट सलीम बेग द्वारा पूछे गए सूचना का अधिकार के तहत खा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त ने स्वीकार भी किया है कि प्रदेश में कृत्रिम रूप से रंगी गई कच्ची सब्जियों के 124 नमूने संग्रहीत कर जांच कराई गई। जांच में पांच नमूने अखा रंगों से रंगे हुए पाए गए। खा आयुक्त ने बताया कि अखा रंगों से रंगी पाई गई पांच नमूनों की सब्जियों के विक्रेताओं को दंडित कराने के लिए खा अपमिश्रण निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा सक्षम न्यायालय में दायर कराए गए। दरअसल जहर के बड़े कारोबारियों के हाथ इतने लम्बे हैं कि खा एवं औषधि प्रशासन विभाग उन्हें पकड़ने की हिमाकत नहीं कर पाता है। विभाग सिर्फ छापेमारी के जरिए उसे ही पकड़ रहा है जो उनके हाथों की कठपुतली बने हुए हैं। सब्जियों में हार्मोन्स की सूई लगाने जैसे अपराध पर भी विभाग ने अपना पल्ला झाड़ लिया है। डीएनए ने जब खा एवं औषधि प्रशासन विभाग के विशेष सचिव शिव श्याम मिश्रा से इस बाबत पूछा तो वे हार्टीकल्चर विभाग पर इसका ठीकरा फोड़ने लगे। श्री मिश्र ने कहा कि पहले आप हार्टीकल्चर से यह पूछो कि वे सब्जियों, फलों व अन्य शाक-भाजी के विकास में क्या प्रमोट करते हैं? वह यूरिया है या अन्य फर्टिलाइजर? अगर सब्जियों की पैदावार में ऑक्सीटोसिन इस्तेमाल किया जा रहा है तो इसे रोकने की जिम्मेदारी उनकी है। हमारी नहीं। उधर विशेष सचिव ने कहा कि हमने 29 लाख ऑक्सीटोसिन के डोज छापेमारी के दौरान पकड़े हैं। बीते नौ महीने में 76 को जेल भेजा है और 89 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। मगर खा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने सब्जियों में हार्मोन्स की सूई लगाकर पैदावार बढ़ाने सम्बंधी किसी ऐसी शिकायत से साफ इनकार कर दिया है। मगर जिस प्रकार कृत्रिम रूप से रंगी गई कच्ची सब्जियों को बेचने तथा हार्मोन्स की सूई के जरिए सब्जियों की पैदावार बढ़ाई जा रही है उससे घातक बीमारियां हो सकती हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. भगवान सिंह ने बताया कि रंगी गई सब्जियों से चर्म रोग, अल्सर तथा पाचन तंत्र खराब हो जाता है। आंतों पर प्रभाव पड़ता है। कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।
हरी सब्जियां ग्रीन प्वाइजन बन चुकी हैं। सरकार इससे बेतकल्लुफ है। जहर के सौदागरों ने लौकी, गाजर, खीरा, करैला, शलजम, टमाटर से लेकर यहां तक कि पपीते में ऑक्सीटोसिन का इंजेक्शन लगाकर पैदावार बढ़ाने और उसके प्राकृतिक आकार में बदलाव पैदा कर दिया है। जहर का यह कारोबार खुलेआम हो रहा है। इसके अलावा सब्जियों को कृत्रिम रंग से रंगने का काम भी बड़ी-बड़ी मंडियों में चल रहा है। आरटीआई ऐक्टिविस्ट सलीम बेग द्वारा पूछे गए सूचना का अधिकार के तहत खा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त ने स्वीकार भी किया है कि प्रदेश में कृत्रिम रूप से रंगी गई कच्ची सब्जियों के 124 नमूने संग्रहीत कर जांच कराई गई। जांच में पांच नमूने अखा रंगों से रंगे हुए पाए गए। खा आयुक्त ने बताया कि अखा रंगों से रंगी पाई गई पांच नमूनों की सब्जियों के विक्रेताओं को दंडित कराने के लिए खा अपमिश्रण निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा सक्षम न्यायालय में दायर कराए गए। दरअसल जहर के बड़े कारोबारियों के हाथ इतने लम्बे हैं कि खा एवं औषधि प्रशासन विभाग उन्हें पकड़ने की हिमाकत नहीं कर पाता है। विभाग सिर्फ छापेमारी के जरिए उसे ही पकड़ रहा है जो उनके हाथों की कठपुतली बने हुए हैं। सब्जियों में हार्मोन्स की सूई लगाने जैसे अपराध पर भी विभाग ने अपना पल्ला झाड़ लिया है। डीएनए ने जब खा एवं औषधि प्रशासन विभाग के विशेष सचिव शिव श्याम मिश्रा से इस बाबत पूछा तो वे हार्टीकल्चर विभाग पर इसका ठीकरा फोड़ने लगे। श्री मिश्र ने कहा कि पहले आप हार्टीकल्चर से यह पूछो कि वे सब्जियों, फलों व अन्य शाक-भाजी के विकास में क्या प्रमोट करते हैं? वह यूरिया है या अन्य फर्टिलाइजर? अगर सब्जियों की पैदावार में ऑक्सीटोसिन इस्तेमाल किया जा रहा है तो इसे रोकने की जिम्मेदारी उनकी है। हमारी नहीं। उधर विशेष सचिव ने कहा कि हमने 29 लाख ऑक्सीटोसिन के डोज छापेमारी के दौरान पकड़े हैं। बीते नौ महीने में 76 को जेल भेजा है और 89 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। मगर खा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने सब्जियों में हार्मोन्स की सूई लगाकर पैदावार बढ़ाने सम्बंधी किसी ऐसी शिकायत से साफ इनकार कर दिया है। मगर जिस प्रकार कृत्रिम रूप से रंगी गई कच्ची सब्जियों को बेचने तथा हार्मोन्स की सूई के जरिए सब्जियों की पैदावार बढ़ाई जा रही है उससे घातक बीमारियां हो सकती हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. भगवान सिंह ने बताया कि रंगी गई सब्जियों से चर्म रोग, अल्सर तथा पाचन तंत्र खराब हो जाता है। आंतों पर प्रभाव पड़ता है। कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।
Sunday, February 20, 2011
गेहूं की फसल में कल्ले निकलने व गांठे बनते समय सिंचाई करें
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को गेहूं की फसल में कल्ले निकलते समय दूसरी सिंचाई एवं गांठे बनते समय तीसरी सिंचाई करने की सलाह दी है। वैज्ञानिकों के अनुसार दोमट मिट्टी में विलम्ब से बुआई वाले क्षेत्नों में नत्नजन की एक चौथाई मात्रा सिंचाई के बाद ओट आने पर दें, हल्की बलुई दोमट मिट्टी में नत्नजन की शेष मात्ना का आधा भाग सिंचाई के बाद ओट आने पर दिया जाए।
फसल सतर्कता समूह के कृषि वौानिकों की सलाह के अनुसार गेहूं की फसल में यदि खपतवार निकाई, गुडाई से नियंत्नित न हो तो चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों जैसे बथुआ, सत्यानाशी, हिरनखुरी, कृष्णनील, गजरी, प्याजी तथा संकरी पत्ती जैसे गेहुआ व जंगली जई के नियंत्नण के लिए सल्फो सल्फ्यूरान 75 प्रतिशत, 32 मिली प्रति हेक्टेयर मेटा सल्फ्यूरान मिथाइल पांच प्रतिशत डब्लू, जी की 40 ग्राम प्रति हेक्टेयर 800 से 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से चपटे नाजिल वाले स्पेयर से बुआई के 30-35 दिन बाद छिड़काव करें। गेहूं में पूर्ण झुलसा का प्रकोप होने पर मैंकोजेब दो किग्रा प्रति हेक्टेयर या जिनेब 75 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण 2.5 किग्रा प्रति हेक्टेयर याथीरम 50 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण 20 किग्रा. के साथ 20 किग्रा. यूरिया को प्रति हेक्टेयर मिलाकर छिड़काव करना चाहिए.
फसल सतर्कता समूह के कृषि वौानिकों की सलाह के अनुसार गेहूं की फसल में यदि खपतवार निकाई, गुडाई से नियंत्नित न हो तो चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों जैसे बथुआ, सत्यानाशी, हिरनखुरी, कृष्णनील, गजरी, प्याजी तथा संकरी पत्ती जैसे गेहुआ व जंगली जई के नियंत्नण के लिए सल्फो सल्फ्यूरान 75 प्रतिशत, 32 मिली प्रति हेक्टेयर मेटा सल्फ्यूरान मिथाइल पांच प्रतिशत डब्लू, जी की 40 ग्राम प्रति हेक्टेयर 800 से 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से चपटे नाजिल वाले स्पेयर से बुआई के 30-35 दिन बाद छिड़काव करें। गेहूं में पूर्ण झुलसा का प्रकोप होने पर मैंकोजेब दो किग्रा प्रति हेक्टेयर या जिनेब 75 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण 2.5 किग्रा प्रति हेक्टेयर याथीरम 50 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण 20 किग्रा. के साथ 20 किग्रा. यूरिया को प्रति हेक्टेयर मिलाकर छिड़काव करना चाहिए.
Friday, February 18, 2011
रबी की फसलों के लिए बरसा वरदान
बढ़ते तापमान की वजह से पानी मांग रही रबी की फसलों के लिए यह बारिश वरदान साबित हो रही है। इस आंधी,पानी से कई क्षेत्रों में उन किसानों का नुकसान भी हुआ है, जिन्होंने दलहनी और तिलहनी फसलें बोने में देर कर दी और अब उनकी फसलों में फूल निकले हुए हैं। कई क्षेत्रों में आई आंधी से जहां सरसों के फूल झड़ गए वहीं उसके बाद हुई बारिश से लंबे पौधे गिर गए हैं।
आज सुबह तक अलीगढ़ में 24 मिलीमीटर, आगरा में 17, बिजनौर में 15, बहराइच 10, सुल्तानपुर में नौ, जालौन में आठ, फैजाबाद में 7.5, लखनऊ में छह, बांदा में तीन, ललितपुर में दो मिलीमीटर तथा प्रदेश के पच्चिमी, पूर्वी और मध्य हिस्से में भी बारिश हुई है। इलाहाबाद, वाराणसी तथा मिर्जापुर की खेती बारिश से वंचित रही। नरेंद्र देव कृषि विश्वविालय कुमारगंज फैजाबाद में मौसम विज्ञान विभाग के प्रमुख प्रोफेसर पद्माकर त्रिपाठी गुरुवार को भी बारिश की संभावना व्यक्त करते हैं। उनके अनुसार इस समय सामान्य तौर पर 26 डिग्री सेल्सियस तापमान होना चाहिए, लेकिन दो दिन पहले यह 29.30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जो फसलों के लिए प्रतिकूल होने लगा था, लेकिन बारिश होने के बाद अब यह घटकर 18 डिग्री सेल्शियस पर आ गया है। प्रोफेसर त्रिपाठी बताते हैं कि तीन दिन से पुरवा हवा चल रही है। पुरवा चलने से वातावरण में नमी की मात्रा बढ़ जाती है और उसी से बादल बनते हैं। इस बारिश से पहले ऐसी ही स्थितियां उत्पन्न हुई जिसकी वजह से पानी बरसा। हालात वैसे ही बने रहने के कारण कल भी बारिश होने के आसार हैं।
उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के उपमहानिदेशक आरएस राठौर कहते हैं कि चंद दिन भी अब अगर वर्षा न होती, तो तापमान बढ़ने से गेहूं के पौधों की लंबाई प्रभावित होने लगती जिसका प्रभाव बालियों पर भी पड़ता। बारिश होने से एक तरफ जहां पौधों को नमी मिल गई वहीं उससे भी अधिक फायदा बढ़ते हुए तापमान के नियंत्रित हो जाने से हुआ है। वह कहते हैं कि फसलों में दाना बनने के समय नमी की बेहद आवश्यकता होती है और इस बारिश ने उस आवश्यकता को पूरा कर दिया है। फूल की अवस्था वाली दलहनी, तिलहनी फसलों में इस बारिश से हुए मामूली नुकसान की आशंका व्यक्त करते हुए वह कहते हैं कि आगे भी इसी तरह मौसम अनुकूल रहा तो रबी में रिकार्ड उत्पादन होगा।
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार 96.09 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं, 1.69 लाख हेक्टेयर में जौ, 6.12 लाख हेक्टेयर में चना, 3.03 लाख हेक्टेयर में मटर, 5.11 लाख हेक्टेयर में मसूर और 6.20 लाख हेक्टेयर में लाही,सरसों की बोआई की गयी है जो क्षेत्रफल के लिहाज से पिछले वषरे के मुकाबले अधिक है।
आज सुबह तक अलीगढ़ में 24 मिलीमीटर, आगरा में 17, बिजनौर में 15, बहराइच 10, सुल्तानपुर में नौ, जालौन में आठ, फैजाबाद में 7.5, लखनऊ में छह, बांदा में तीन, ललितपुर में दो मिलीमीटर तथा प्रदेश के पच्चिमी, पूर्वी और मध्य हिस्से में भी बारिश हुई है। इलाहाबाद, वाराणसी तथा मिर्जापुर की खेती बारिश से वंचित रही। नरेंद्र देव कृषि विश्वविालय कुमारगंज फैजाबाद में मौसम विज्ञान विभाग के प्रमुख प्रोफेसर पद्माकर त्रिपाठी गुरुवार को भी बारिश की संभावना व्यक्त करते हैं। उनके अनुसार इस समय सामान्य तौर पर 26 डिग्री सेल्सियस तापमान होना चाहिए, लेकिन दो दिन पहले यह 29.30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जो फसलों के लिए प्रतिकूल होने लगा था, लेकिन बारिश होने के बाद अब यह घटकर 18 डिग्री सेल्शियस पर आ गया है। प्रोफेसर त्रिपाठी बताते हैं कि तीन दिन से पुरवा हवा चल रही है। पुरवा चलने से वातावरण में नमी की मात्रा बढ़ जाती है और उसी से बादल बनते हैं। इस बारिश से पहले ऐसी ही स्थितियां उत्पन्न हुई जिसकी वजह से पानी बरसा। हालात वैसे ही बने रहने के कारण कल भी बारिश होने के आसार हैं।
उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के उपमहानिदेशक आरएस राठौर कहते हैं कि चंद दिन भी अब अगर वर्षा न होती, तो तापमान बढ़ने से गेहूं के पौधों की लंबाई प्रभावित होने लगती जिसका प्रभाव बालियों पर भी पड़ता। बारिश होने से एक तरफ जहां पौधों को नमी मिल गई वहीं उससे भी अधिक फायदा बढ़ते हुए तापमान के नियंत्रित हो जाने से हुआ है। वह कहते हैं कि फसलों में दाना बनने के समय नमी की बेहद आवश्यकता होती है और इस बारिश ने उस आवश्यकता को पूरा कर दिया है। फूल की अवस्था वाली दलहनी, तिलहनी फसलों में इस बारिश से हुए मामूली नुकसान की आशंका व्यक्त करते हुए वह कहते हैं कि आगे भी इसी तरह मौसम अनुकूल रहा तो रबी में रिकार्ड उत्पादन होगा।
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार 96.09 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं, 1.69 लाख हेक्टेयर में जौ, 6.12 लाख हेक्टेयर में चना, 3.03 लाख हेक्टेयर में मटर, 5.11 लाख हेक्टेयर में मसूर और 6.20 लाख हेक्टेयर में लाही,सरसों की बोआई की गयी है जो क्षेत्रफल के लिहाज से पिछले वषरे के मुकाबले अधिक है।
Saturday, January 29, 2011
Friday, January 21, 2011
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