Friday, September 14, 2012

किसानों को नि:शुल्क दी जाए बिजली व पानी



लखनऊ (एसएनबी)। किसानों को निशुल्क बिजली सहित अन्य 11 मांगों को लेकर मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन (भुल्लन गुट) के बैनर तले सैकड़ों किसानों ने विधानभवन के समक्ष धरना-प्रदर्शन कर अपर नगर मजिस्ट्रेट के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। प्रदर्शन के दौरान हुई सभा में यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष बृजकिशोर यादव ने कहा कि किसानों को गन्ने का बकाया भुगतान नहीं हो रहा है और उनके कज्रे माफ करने की बात सरकार तो की है लेकिन अभी तक कर्जा माफ करने की पहल नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को सरकारी नलकूपों से पानी व बिजली नि:शुल्क दी जाय। प्रदेश में किसानों की हालत चिन्ताजनक बनी हुई है। उन्हें समय से खाद व अन्य रासायनिक दवाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिससे किसानों को दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने कहा कि खादों की हो रही कालाबजारी से किसानों को महंगी खाद मिल पा रही हैं, जिससे लोगों की फसल चौपट हो रही है। जिलाध्यक्ष बैजनाथ यादव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में निवास प्रमाण पत्र व अन्य प्रमाण पत्रों के नाम पर लेखपाल व अधिकारियों की मिलीभगत से लोगों से 1000 से 1500 रुपये वसूले जा रहे हैं, जिससे लोगों को परेशानियां हो रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे अधिकारियों व लेखपालों की जांच कराकर कार्रवाई करायी जाय। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो प्रदेश के किसान सड़कों पर उतरेंगे। धरने पर जितेन्द्र नाथ आर्या, राम इकबाल तिवारी, भानू सिंह, ध्यान सिंह, रामचन्दर सिंह सहित सैकड़ों किसान मौजूद थे। पदोन्नति के लिए सत्याग्रह जारी : पदोन्नति सहित अन्य मांगों को लेकर मंगलवार को मिनिस्टीरियल एसोसिएशन ऑफ सर्किल ऑफिसेज के बैनर तले कर्मचारियों का सत्याग्रह दूसरे दिन भी जारी रहा। सत्याग्रह पर बैठे कैलाश यादव ने कहा कि कनिष्ठ सहायक का ग्रेड वेतन 2400 रुपये, वरिष्ठ सहायक 4200, प्रशासनिक अधिकारी का पद राजपत्रित करते हुए ग्रेड वेतन 5400 किया जाय। प्रान्तीय महामंत्री आनन्द कुमार बाजपेयी ने कहा कि कनिष्ठ सहायक पर मृतक अश्रितों की नियुक्ति के लिए अनिवार्यता समाप्त कर कमचारियों की नियुक्ति की मांग की। इस मौके पर लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, फैजाबाद, मेरठ, बस्ती, झॉसी व इलाहाबाद के कर्मचारी मौजूद थे। डीआईजी लखनऊ रेंज नवनीत जानकीपुरम में अधिग्रहण का प्रस्ताव वापस करने के लिए किसान धरने पर बैठे लखनऊ। अधिग्रहण का प्रस्ताव वापस करने सहित अन्य पांच सूत्री मांगों को लेकर मंगलवार को सैकड़ों किसानों ने जानकीपुरम विस्तार स्थित रसूलपुर गांव व चौधरीपुरवा की जमीनों पर धरने पर बैठकर मण्लायुक्त व लविप्रा उपाध्यक्ष को ज्ञापन प्रेषित किया। धरनास्थल पर हुई सभा को सम्बोधित करने हुए किसान नेता चौधरी हरिनाम सिंह यादव काका ने कहा कि चौधरीपुरवा, रसूलपुर, मड़ियाव व गड़ेरियन पुरवा की जमीनों को अधिग्रहण करने का जो प्रस्ताव भेजा गया है उसे तत्काल वापस किया जाए।

चुनिंदा कृषि जिंसों की तय होगी न्यूनतम निर्यात सीमा



नई दिल्ली, एजेंसियां : चुनिंदा कृषि जिंसों की न्यूनतम निर्यात सीमा तय करने पर सरकार विचार कर रही है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में बने रहने में भारत को मदद मिलेगी। खाद्य मंत्री केवी थॉमस के मुताबिक आयात-निर्यात नीति के तहत इसकी प्रक्रिया तैयार करने पर काम चल रहा है। चीनी उद्योग पर यहां आयोजित एक सम्मेलन में थॉमस ने कहा कि देश के व्यापारिक हित में यह सही नहीं है कि कुछ साल तो हम निर्यात करते रहें और अचानक ही निर्यात पर पाबंदी लगा दी जाए। सरकार गेहूं, चावल और चीनी की न्यूनतम मात्रा में निर्यात की योजना बना रही है। वाणिज्य मंत्रालय से इस बारे में विचार विमर्श हो रहा है। इससे न सिर्फ किसानों बल्कि निर्यातकों को भी फायदा होगा। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि इन तीनों जिंसों के निर्यात की मौजूदा नीति बनी रहेगी। चीनी उद्योग को नियंत्रणमुक्त करने के बारे में उन्होंने कहा कि इस बारे में सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। इस पर बनी रंगराजन समिति जल्द ही प्रधानमंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इस रिपोर्ट के मंजूर होते ही इसकी सिफारिशों को जल्द से जल्द लागू कराया जाएगा। थॉमस ने उम्मीद जताई कि अगले चीनी विपणन वर्ष (अक्टूबर-सितंबर) में भी घरेलू मांग के मुकाबले चीनी का उत्पादन ज्यादा रहेगा। 2012-13 में इसका 2.45 करोड़ टन उत्पादन होने का अनुमान है। इस दौरान घरेलू मांग 2.2 करोड़ टन रहने की उम्मीद है। इसे देखते हुए निर्यात के लिए सरप्लस चीनी बचेगी। यह लगातार तीसरा साल होगा जब चीनी का बंपर उत्पादन होगा। चालू चीनी वर्ष में 2.6 करोड़ टन उत्पादन हुआ है। इस दौरान सरकार ने 33 लाख टन चीनी निर्यात की मंजूरी दी है। भारत चीनी का सबसे बड़ा उपभोक्ता और दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।
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Tuesday, September 11, 2012

कृषि कर्ज पर किसानों को मिल सकती है रियायत


नई दिल्ली, प्रेट्र : कृषि कर्ज पर ब्याज दरों में कटौती के जरिये सरकार सूखे से प्रभावित किसानों के जख्मों पर मरहम लगाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत समय पर कर्ज का भुगतान नहीं करने पर ब्याज दर को सात फीसद पर ही बरकरार रखने का प्रस्ताव है। मंत्रियों का अधिकार प्राप्त समूह (ईजीओएम) मंगलवार को इस पर फैसला कर सकता है। अभी कृषि कर्ज सात फीसद की दर पर दिया जाता है। मगर सूखे जैसी स्थिति में समय पर भुगतान नहीं करने से इसे मियादी कर्ज में बदल दिया जाता है और इस पर 12 फीसद ब्याज चुकाना होता है। इसके तहत किसानों को कर्ज चुकाने के लिए तीन साल का समय मिल जाता है। सूखे से प्रभावित राज्य कृषि कर्ज पर रियायत देने की मांग कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक ईजीओएम में मियादी कर्ज का मामला प्रमुखता से उठाया जाएगा। कृषि मंत्री शरद पवार की अध्यक्षता वाले ईजीओएम में मनरेगा के तहत 100 दिन के रोजगार को 150 दिन करने पर भी विचार होगा। यह योजना सिर्फ चालू वित्त वर्ष के लिए होगी। इसके अलावा बाग-बगीचों, फलों और मेवे की खेती को बचाने के लिए विशेष पैकेज पर भी ईजीओएम में चर्चा होगी। यदि ईजीओएम कृषि कर्ज पर ब्याज घटाने का फैसला करता है तो किसानों को बड़ी राहत मिलेगी।


Monday, September 10, 2012

जीडीपी में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी घटी


सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि की हिस्सेदारी पिछले लगभग आठ साल में पांच प्रतिशत घटकर 14 प्रतिशत रह गई। इसका कारण अन्य क्षेत्रों में उच्च वृद्धि है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों का योगदान वर्ष 2004-05 में जीडीपी का 19 प्रतिशत था तो 2004- 05 के मूल्य स्तर के मुकाबले वर्ष 2011-12 में 14 प्रतिशत रह गया। समय बीतने के साथ इस प्रतिशत में लगातार कमी आ रही है। आंकड़ों में कहा गया है कि जीडीपी में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों का योगदान वर्ष 2004-05 के 19 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2005-06 में 18.3 प्रतिशत रह गया जबकि वर्ष 2006-07 में यह घटकर 17.4 प्रतिशत रह गया। वर्ष 2007-08 में 16.8 प्रतिशत, वर्ष 2008-09 में 15.8 प्रतिशत जबकि वर्ष 2011-12 में कृषि क्षेत्र का योगदान और घटकर 14 प्रतिशत रह गया। सरकारी सूत्रों ने बताया कि यह गिरावट गैर कृषि क्षेत्रों के जीडीपी में अधिक योगदान की तुलना के कारण है। लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि कृषि की स्थिति दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार कृषि क्षेत्र में सकल पूंजी सृजन (जीसीएफ) निवेश वर्ष 2004-05 के 69,148 करोड़ रुपए से बढ़कर वर्ष 2010-11 में 1,30,907 करोड़ रुपए हो गया। इसमें कहा गया है कि इसके अलावा ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजनावधि में कृषि क्षेत्र का औसत विकास दर 3.3 प्रतिशत रहा जो 10वीं योजनावधि के दौरान 2.4 प्रतिशत था। खाद्यान्न उत्पादन भी वर्ष 2006-07 के 21 करोड़ 72.8 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2011-12 में 25 करोड़ 74.4 लाख टन हो गया। संयुक्त राष्ट्र की इकाई खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के अनुसार दुनिया की कुल खेतीयोग्य भूमि में भारत की हिस्सेदारी 2.3 प्रतिशत है।